कुरान की आयत

وَ اِذَا مَسَّ الْاِنْسَانَ الضُّرُّ دَعَانَا لِجَنْۢبِهٖۤ اَوْ قَاعِدًا اَوْ قَآئِمًا فَلَمَّا كَشَفْنَا عَنْهُ ضُرَّهٗ مَرَّ كَاَنْ لَّمْ یَدْعُنَاۤ اِلٰى ضُرٍّ مَّسَّهٗ كَذٰلِكَ زُیِّنَ لِلْمُسْرِفِیْنَ مَا كَانُوْا یَعْمَلُوْنَ(۱۲)(سورۃ یونس)
अनुवाद
जब इंसान पर कोई मुसीबत आती है तो वह लेटकर, बैठकर और खड़े होकर हमें पुकारता है। फिर जब हम उसकी मुसीबत दूर कर देते हैं तो वह ऐसे चल देता है जैसे उसने कभी किसी मुसीबत में हमें पुकारा ही न था। जो लोग सीमा से आगे बढ़ जाते हैं, उन्हें उनके किए हुए कर्म इसी तरह अच्छे लगते हैं।
युवा पीढ़ी की तरबियत: शरीयत बनाम सामाजिक परंपराएँ
लेख

युवा पीढ़ी की तरबियत: शरीयत बनाम सामाजिक परंपराएँ

कितने पुरुष हैं जिन्हें बालिग होते ही "सूरह अल-माएदा" की तफ़सीर पढ़ाई गई और कितनी महिलाएँ हैं जिन्हें बालिग होते ही "सूरह अन-नूर" की तफ़सीर पढ़ाई गई? जानता हूँ, बहुत कम हैं। मगर दूसरी तरफ देखें...! कितने पुरुष हैं जिन्होंने माता-पिता से बालिग होने के बाद सुना कि "तुम्हारी कोई ऐसी-वैसी बात न स...

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