कुरान की आयत

مَثَلُ الَّذِیْنَ یُنْفِقُوْنَ اَمْوَالَهُمْ فِیْ سَبِیْلِ اللّٰهِ كَمَثَلِ حَبَّةٍ اَنْۢبَتَتْ سَبْعَ سَنَابِلَ فِیْ كُلِّ سُنْۢبُلَةٍ مِّائَةُ حَبَّةٍ وَ اللّٰهُ یُضٰعِفُ لِمَنْ یَّشَآءُ وَ اللّٰهُ وَاسِعٌ عَلِیْمٌ(۲۶۱)(سورۃ البقرہ)
अनुवाद
जो लोग अल्लाह के रास्ते में अपने माल ख़र्च करते हैं उनकी मिसाल ऐसी है जैसे एक दाना सात बालें उगाए (और) हर बाली में सौ दाने हों और अल्लाह जिसके लिए चाहता है (सवाब में) कई गुना इज़ाफ़ा कर देता है, अल्लाह बहुत वुसअत वाला (और) बड़े इल्म वाला है।(२६१)(आसान तर्जुमा-तुल-क़ुरआन) यानी: अल्लाह के रास्ते में ख़र्च करने से सात सौ गुना सवाब मिलता है और अल्लाह तआला जिसका सवाब चाहें और बढ़ा सकते हैं, वाज़ेह रहे कि अल्लाह के रास्ते में ख़र्च का क़ुरआन करीम ने बार-बार ज़िक्र किया है और इससे मुराद हर वह ख़र्च है जो अल्लाह तआला की ख़ुशनूदी हासिल करने के लिए किया जाए इसमें ज़कात, सदक़ात और ख़ैरात सब दाख़िल हैं।(आसान तर्जुमा-तुल-क़ुरआन)
एक अरब डॉक्टर और धार्मिक विद्वान की छात्र को महत्वपूर्ण नसीहत
लेख

एक अरब डॉक्टर और धार्मिक विद्वान की छात्र को महत्वपूर्ण नसीहत

सवाल किया गया: शुरुआती छात्र के लिए कोई संक्षिप्त नसीहत? मैंने बार-बार नसीहत की है, मगर जानता हूँ कि हर नसीहत का पहला मुखातिब (संबोधित) खुद मेरा दिल है। लेकिन शायद दोहराने में हिकमत (बुद्धिमानी) हो और फायदा पहुँचे: जान लो, ऐ मेरे प्यारे बेटे, वह ज़माना गुज़र चुका, जब इल्म-ए-रिवायत व दिरायत (पारंपरिक...

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