कुरान की आयत

قُلْ اِنِّیْۤ اُمِرْتُ اَنْ اَعْبُدَ اللّٰهَ مُخْلِصًا لَّهُ الدِّیْنَۙ(۱۱)وَ اُمِرْتُ لِاَنْ اَكُوْنَ اَوَّلَ الْمُسْلِمِیْنَ(۱۲)(سورۃ الزمر)
अनुवाद
कह दो कि : मुझे तो हुक्म दिया गया है कि मैं अल्लाह की इस तरह इबादत करूँ कि मेरी बंदगी ख़ालिस उसी के लिए हो।(११) और मुझे हुक्म दिया गया है कि सबसे पहला फ़रमांबरदार मैं बनूँ।(१२)(आसान तर्जुमा-तुल-क़ुरआन) यानी : इसमें यह तालीम दी गई है कि जो शख़्स दूसरों को किसी नेकी की दावत दे, उसे चाहिए कि पहले ख़ुद उस पर अमल कर के दिखाए।(आसान तर्जुमा-तुल-क़ुरआन)
शीशे से दीवार तक
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शीशे से दीवार तक

एक महिला कहती हैं: एक दिन मैं अपने घर की सफ़ाई कर रही थी, इतने में मेरा बेटा आया और शीशे का एक नायाब तोहफा (शाहकार) गिरा दिया और वह टूट गया। मैं उससे बहुत नाराज़ थी क्योंकि यह बहुत महंगा था, मेरी मां ने मुझे दिया था, मैं इसे पसंद करती थी और इसे संभालकर रखना चाहती थी। मैंने गुस्से में उसे बुलाया और...

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