لَخَلْقُ السَّمٰوٰتِ وَ الْاَرْضِ اَكْبَرُ مِنْ خَلْقِ النَّاسِ وَ لٰكِنَّ اَكْثَرَ النَّاسِ لَا یَعْلَمُوْنَ(۵۷)(سورۃ المؤمن)
अनुवाद
यक़ीनी बात है कि आसमानों और ज़मीन का पैदा करना इंसानों के पैदा करने से ज़्यादा बड़ा काम है, लेकिन अक्सर लोग (इतनी सी बात) नहीं समझते।(५७)(आसान तर्जुमा-तुल-क़ुरआन)
यानी: मुशरिकीन-ए-अरब मानते थे कि आसमान व ज़मीन सब अल्लाह तआला के पैदा किए हुए हैं। अल्लाह तआला की इतनी सी बात उनकी समझ में नहीं आती कि जो ज़ात इतनी अज़ीमुश्शान चीज़ें अदम से वजूद में ला सकती है, उसके लिए इंसानों को दोबारा पैदा करना क्या मुश्किल है। चुनाँचे इस वाज़ेह बात का भी वह इनकार करते हैं।(आसान तर्जुमा-तुल-क़ुरआन)