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मणिपुर में फिर उबाल: कांगपोकपी में 48 घंटे का बंद, हिंसा के बीच गठबंधन सरकार में गहराया राजनीतिक संकट

मणिपुर के कांगपोकपी जिले में 48 घंटे का बंद जारी है। कुकी-ज़ोमी संगठन कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (COTU) ने दो कुकी पुरुषों के कथित अपहरण के विरोध में यह बंद बुलाया है और दोनों की सुरक्षित व बिना शर्त रिहाई की मांग की है। तनाव, अपहरण और हमलों की घटनाएं बढ़ने से पिछले कुछ हफ्तों में राज्य में ऐसे कई बंद बुलाए जा चुके हैं।

अक्टूबर में कैसे बिगड़े हालात?

18 से 22 अक्टूबर: कुकी सिविल सोसाइटी संगठनों की कार्यसमिति ने कामजोंग जिले में भारत-म्यांमार सीमा के पास गांवों पर हुए सिलसिलेवार हमलों के विरोध में बंद बुलाया।

19 अक्टूबर: अलग-अलग घटनाओं में तीन मेईतेई पुरुषों की गोली मारकर हत्या हुई, जिसके विरोध में नेटिव पीपुल्स कमेटी मणिपुर (NPCM) ने इंफाल घाटी में 48 घंटे के बंद का आह्वान किया।

20 अक्टूबर: कांगपोकपी के पी. मोल्डिंग गांव में एक नागरिक की हत्या हुई।

मध्य अक्टूबर: 2023 में मेईतेई-कुकी संघर्ष शुरू होने के बाद पहली बार मेईतेई हिंदुओं और मेईतेई पांगलों (मुसलमानों) के बीच झड़प हुई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हुई और कई घर जलाए गए (HT की रिपोर्ट के अनुसार)।

सितंबर से: नगा-कुकी झड़पें जारी हैं। कांगपोकपी के मकुई चमरियुपुई, थानाम्बा और थेबराम में दर्जनों घर जलाए गए, और नगा बहुल कई गांवों में भी आगजनी हुई। 15 सितंबर को तामेंगलोंग में दो कुकी महिलाओं की गोली मारकर हत्या हुई।

जुलाई: छह आम नागरिकों की हत्या के बाद एक महीने से ज्यादा चली नगा नाकेबंदी ने जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बाधित की और तनाव बढ़ाया। NIA मई-जून में छह नगा पुरुषों के अपहरण और हत्या की जांच कर रही है।

सरकार में राजनीतिक संकट

नगा जनजातियों के कम से कम आठ विधायकों ने गृह मंत्री अमित शाह से कुकी-जो सशस्त्र समूहों के साथ हुए त्रिपक्षीय सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) समझौते तुरंत रद्द करने की मांग की है। उन्होंने हिंसा के लिए उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन के पति थांगबोई किपगेन को जिम्मेदार ठहराया।

अब उपमुख्यमंत्री लोसी डिखो भी इन आवाजों में शामिल हो गए हैं। 28 अक्टूबर को उन्होंने आरोप लगाया कि इस साल नगा समुदाय के लोगों की हत्याओं के पीछे थांगबोई का हाथ है। उन्हें कुकी नेशनल फ्रंट (KNF) की भूमिका पर कोई संदेह नहीं है, जिसका नेतृत्व थांगबोई करते बताए जाते हैं।

नेमचा किपगेन थांगबोई के उग्रवादियों से गठजोड़ के आरोपों को पहले ही खारिज कर चुकी हैं। उन्होंने सभी समुदायों से शांति की अपील भी की है।

डिखो की पार्टी NPF के विधानसभा में 5 विधायक हैं, जबकि भाजपा के पास 37 सीटें हैं। NPF राज्य की गठबंधन सरकार और NDA, दोनों का हिस्सा है।

क्या है SoO समझौता?

KNF उन सशस्त्र समूहों में है, जो केंद्र, राज्य सरकार और कुकी सशस्त्र संगठनों के बीच SoO समझौते के दायरे में आते हैं। इन्हें 4 सितंबर 2025 को आगे बढ़ाया गया था। शर्तों में शिविरों के बीच आवाजाही पर नियंत्रण, हथियारों को 'डबल-लॉक' में रखना और सदस्यों के लिए आधार कार्ड अनिवार्य करना शामिल है। इनका मकसद संविधान के दायरे में मणिपुर संकट का राजनीतिक समाधान खोजना है। इसके बावजूद 2026 में सशस्त्र समूहों की गोलीबारी, बंधक बनाने, आगजनी और राजमार्ग नाकेबंदी जैसी घटनाओं में संलिप्तता की खबरें आती रही हैं।