जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) का परिसर एक बार फिर हिंसक टकराव की चपेट में आ गया, जहां छात्र संघ के अध्यक्ष नितेश कुमार सहित 28 छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हुई, जिसमें 6 पुलिसकर्मी घायल हो गए। छात्रों ने बैरिकेड्स तोड़कर नेल्सन मंडेला रोड पर विरोध प्रदर्शन किया, जिससे ट्रैफिक जाम हो गया। पुलिस ने तुरंत 19 पुरुषों और 9 महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने नितेश पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया, यह आरोप लगाते हुए कि उन्होंने डीन ऑफ स्टूडेंट्स कार्यालय के पास बैरिकेड्स तोड़े और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।
घटना का विवरण:
6 अक्टूबर 2025 की शाम को जेएनयू के पश्चिमी गेट पर 70-80 छात्र एकत्र हुए, जो नेल्सन मंडेला रोड पर विरोध प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने बैरिकेड्स लगा दिए थे, और शुरुआती बातचीत के बाद छात्र आक्रोशित हो गए, जिससे हाथापाई शुरू हो गई। पुलिस के मुताबिक, छात्रों ने बैरिकेड्स तोड़ दिए और ट्रैफिक जाम कर दिया। डीसीपी ने बताया कि '6 कर्मी (4 पुरुष, 2 महिला) घायल हुए, जिन्हें चिकित्सा सहायता दी गई।'
छात्र संघ ने विरोध प्रदर्शन को 'हॉस्टल खाली करने के नोटिस' के खिलाफ बताया, जबकि प्रशासन ने नितेश पर 'कानून के उल्लंघन' का आरोप लगाया। गिरफ्तार छात्रों को हिरासत में ले लिया गया और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा: "छात्रों का विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र का प्रतीक है, पुलिस की कार्रवाई अस्वीकार्य है।" भाजपा ने 'छात्रों की अशांति' की निंदा की। जेएनयू, जो छात्र विरोध प्रदर्शनों का केंद्र रहा है, 2020 के सीएए (CAA) विरोध प्रदर्शनों के बाद से विवादों में रहा है।
"छात्रों की आवाज दबाना लोकतंत्र पर हमला है।" — जयराम रमेश
संदर्भ:
द हिंदू, इंडिया टुडे, टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स, द इंडियन एक्सप्रेस, एक्स पोस्ट