अंतरिक्ष स्टेशन की अनूठी दुनिया: अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, रूस, जापान और यूरोप के अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का परिणाम है। यह स्टेशन पृथ्वी की परिक्रमा 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से करता है और हर 90 मिनट में एक चक्कर पूरा करता है। इस गति के कारण, अंतरिक्ष यात्रियों को हर 45 मिनट में दिन और रात का अनुभव होता है, यानी दिन में 16 बार सूर्योदय और सूर्यास्त। यह पृथ्वी पर सामान्य 24 घंटे के दिन से बिल्कुल अलग है। ऐसे विचित्र वातावरण में, अंतरिक्ष यात्री अपने जीवन को व्यवस्थित रखने के लिए समन्वित सार्वभौमिक समय (UTC) के अनुसार एक समय सारिणी का पालन करते हैं। उनका दिन सुबह 6 बजे शुरू होता है, जो काम, व्यायाम और आराम के व्यवस्थित संतुलन पर आधारित है। नींद प्रबंधन: अंतरिक्ष स्टेशन पर शून्य गुरुत्वाकर्षण के वातावरण में पारंपरिक बिस्तर की अवधारणा ही समाप्त हो जाती है। अंतरिक्ष यात्री सोने के लिए दीवारों से लटके विशेष स्लीपिंग बैग का उपयोग करते हैं। ये बैग उन्हें तैरती हुई स्थिति में स्थिर रखते हैं। सोते समय रोशनी को रोकने के लिए स्टेशन की खिड़कियों पर पर्दे लगाए गए हैं, क्योंकि सूर्य की रोशनी हर 45 मिनट में अंदर आती है। इससे नींद में खलल पड़ सकता है। प्रत्येक अंतरिक्ष यात्री को 8 घंटे की नींद दी जाती है, जो यूटीसी द्वारा निर्धारित की जाती है। सोने से पहले, उन्हें स्लीपिंग बैग में बांध दिया जाता है ताकि वे स्टेशन के अंदर तैरते न रहें। एक अंतरिक्ष यात्री ने अपने अनुभव का वर्णन किया: “शून्य गुरुत्वाकर्षण में सोना एक अजीब अनुभव है। आप एक बैग में बंद होते हैं और दीवार से लटके होते हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद यह सामान्य हो जाता है।” कार्य और व्यायाम कार्यक्रम: अंतरिक्ष यात्री प्रतिदिन 8 से 10 घंटे काम करते हैं, जिसमें वैज्ञानिक प्रयोग, स्टेशन का रखरखाव और व्यायाम शामिल हैं। प्रत्येक दिन का कार्यक्रम ग्राउंड कंट्रोल टीम के समन्वय से बनाया जाता है। शून्य गुरुत्वाकर्षण के कारण मांसपेशियों और हड्डियों की कमजोरी को रोकने के लिए, प्रत्येक अंतरिक्ष यात्री प्रतिदिन 2 घंटे व्यायाम करता है, जिसमें ट्रेडमिल, साइकिल और प्रतिरोध व्यायाम शामिल हैं। शेष समय बैठकों, ग्राउंड कंट्रोल के साथ संचार और डेटा रिकॉर्डिंग में व्यतीत होता है। अंतरिक्ष यात्रियों का कार्यक्रम इस तरह से संरचित किया गया है कि वे काम और आराम के बीच संतुलन बनाए रख सकें। भोजन और मनोरंजन: अंतरिक्ष स्टेशन पर भोजन फ्रीज-ड्राइड और वैक्यूम-पैक किया जाता है, जिसमें चावल, फल, दालें आदि शामिल हैं। अन्य खाद्य पदार्थ भी उपलब्ध हैं। भोजन गर्म करने के लिए एक छोटा ओवन भी है। पानी का पुनर्चक्रण किया जाता है, जो स्टेशन की आत्मनिर्भरता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि 16 बार सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा बेहद मनमोहक होता है, लेकिन यह अंतरिक्ष यात्रियों के लिए थका देने वाला भी हो सकता है। तनाव से बचने के लिए वे किताबें पढ़ते हैं, संगीत सुनते हैं और पृथ्वी के खूबसूरत नजारों की तस्वीरें लेते हैं। वे ग्राउंड कंट्रोल के माध्यम से अपने परिवार से वीडियो कॉल भी करते हैं, जिससे उनका मानसिक तनाव कम होता है। अपने अनुभव का वर्णन करते हुए एक अंतरिक्ष यात्री ने कहा: "पृथ्वी से 400 किलोमीटर ऊपर, जब आप नीले ग्रह को देखते हैं, तो आपको एहसास होता है कि हम ब्रह्मांड का कितना बड़ा हिस्सा हैं। यह नजारा हर पल को सार्थक बना देता है।" शुभांशु शुक्ला की ऐतिहासिक यात्रा: भारतीय वायु सेना के विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला ने 27 जून, 2025 को अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पहुंचकर भारत का नाम रोशन किया। वे राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय अंतरिक्ष यात्री हैं। उनके आगमन पर वर्तमान आईएसएस क्रू ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। शुक्ला ने इसरो के अगस्त 2024 मिशन के तहत प्रशिक्षण प्राप्त किया और अब वे अंतरिक्ष स्टेशन पर हैं। वे वैज्ञानिक प्रयोगों का हिस्सा बन रहे हैं। स्रोत: नासा की आधिकारिक वेबसाइट: इसरो की आधिकारिक वेबसाइट: द हिंदू: इंडिया टुडे: X पोस्ट: