New Heart Touching Emotional Kalam 2026 - Mujhe Kuch Bhi Nahi Kehna - Munajat - Hafiz Abubakar Khan

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साजिश हो तो ऐसी!

साजिश हो तो ऐसी!

एक व्यक्ति अपनी पत्नी को लेकर एक धार्मिक विद्वान (आलिम-ए-दीन) के पास आया और कहने लगा: "हज़रत साहब! यह मेरी पत्नी हैं, इन पर अचानक किसी साए (आसिब) का हमला हुआ है, शायद जिन्न चढ़ा है।" जब इमाम साहब ने दम-दुरूद (दुआ) किया तो जिन्न बातें करने लगा। हज़रत साहब: "अभी के अभी बाहर निकलो, वरना मैं... !" जिन्न: "मैं निकलने के लिए तैयार हूँ, लेकिन मेरी एक शर्त है; मैं इस औरत से निकलकर शौहर (पति) से चिपट जाऊँगा।" (पति डर के मारे दो कदम पीछे हट जाता है) मौलाना साहब: "यह नहीं हो सकता। लेकिन तुम इस औरत के शौहर से क्यों चिपट जाना चाहते हो?" जिन्न: "क्योंकि यह नमाज़ नहीं पढ़ता...!!!" इमाम साहब: "अच्छा तुम ऐसा करो, इनकी बीवी से निकल जाओ और इनके घर के करीब रहो। इस औरत का शौहर नमाज़ न पढ़े तो फिर इस शख्स से चिपट जाना।" जिन्न: "ठीक है........." जिन्न निकल जाता है। कुछ दिनों बाद वह औरत आलिम साहब को फोन करके शुक्रिया अदा करती है कि अब न सिर्फ उनका शौहर पहली सफ (कतार) में नमाज़ पढ़ता है, बल्कि अक्सर मस्जिद का दरवाज़ा भी वही खोलता है और अज़ान भी देता है। यह भेद (राज) बाद में खुला कि उस महिला को जिन्न-विन्न कुछ नहीं चढ़ा था, उसने अपने पति को नमाज़ का पाबंद बनाने के लिए यह सारा नाटक (वारदात) रचा था। 😎 "बेशक तुम्हारा फरेब/चाल बहुत बड़ी है" (इन्न कैदकुन्न अज़ीम)। अरबी से अनुवाद। मनकूल (नकल किया गया)।