Wo Shehr e Muhammad ﷺ - Beautiful Naat Sharif - Wajid Iqbal Malik

इसे शेयर करें:
WhatsApp Facebook

ارے بھائی!

اگر آپ ہزاروں کتابیں، نعتیں، تصاویر، ویڈیوز، اخبار، مضامین، قبلہ نما، اوقات نماز، اسلامک گھڑی اور بہت کچھ آسانی کے ساتھ حاصل کرنا چاہتے ہیں تو بس ہمارے Islamic Tube ایپ کو پلے سٹور سے انسٹال کرو، اور بالکل مفت اور آسانی کے ساتھ اسلامک مواد حاصل کرو

ڈاؤن لوڈ کریں

Naats

दूसरों के लिए गड्ढा खोदने वाले (एक फ़िक़्ही हिकायत)

दूसरों के लिए गड्ढा खोदने वाले (एक फ़िक़्ही हिकायत)

दो औरतें क़ाज़ी इब्न अबी लैला की अदालत में पहुँचीं, यह अपने ज़माने के मशहूर और जाने-माने क़ाज़ी थे। क़ाज़ी ने पूछा, "तुम दोनों में से किसे पहले बात करनी है?" उनमें से बड़ी उम्र वाली महिला ने दूसरी से कहा, "तुम अपनी बात क़ाज़ी साहब के सामने रखो।" वह कहने लगी, "क़ाज़ी साहब, यह मेरी फूफी (बुआ) हैं, मैं इन्हें अम्मी कहती हूँ क्योंकि मेरे वालिद (पिता) के इंतक़ाल के बाद इन्होंने ही मेरी परवरिश की है, यहाँ तक कि मैं जवान हो गई।" क़ाज़ी ने पूछा, "इसके बाद?" वह कहने लगी, "फिर मेरे चाचा के बेटे ने मंगनी का पैग़ाम भेजा, इन्होंने उससे मेरी शादी कर दी। मेरी शादी को कई साल गुज़र गए, अज़दवाजी ज़िंदगी (वैवाहिक जीवन) बहुत अच्छी गुज़र रही थी। एक दिन मेरी यह फूफी मेरे घर आईं और मेरे शौहर (पति) को अपनी बेटी से दूसरी शादी का ऑफ़र दिया, साथ ही यह शर्त रख दी कि पहली बीवी (यानी मेरा) मामला फूफी के हाथ में सौंप दें। मेरे शौहर ने कुंवारी लड़की से शादी के चक्कर में शर्त मान ली। मेरे शौहर की दूसरी शादी हो गई। रात को मेरी फूफी मेरे पास आईं और मुझसे कहा, 'तुम्हारे शौहर के साथ मैंने अपनी बेटी ब्याह दी है, तुम्हारे शौहर ने तुम्हारा मामला मेरे हाथ सौंप दिया है। मैं तुझे तेरे शौहर की वकालत (प्रतिनिधित्व) करते हुए तलाक़ देती हूँ।' जज साहब, मेरी तलाक़ हो गई।" "कुछ समय बाद मेरी फूफी के शौहर सफ़र से थके-हारे पहुँचे। वह एक शायर और हुस्न-परस्त (सुंदरता के प्रेमी) इंसान थे। मैं बन-संवर कर उनके सामने बैठ गई और उनसे कहा, 'क्या आप मुझसे शादी करेंगे?' उनकी ख़ुशी का ठिकाना न रहा, उन्होंने फ़ौरन हाँ कर दी। मैंने उनके सामने शर्त रख दी कि आपकी पहली बीवी (यानी मेरी फूफी) का मामला मेरे हाथ सौंप दें। उन्होंने ऐसा ही किया। मैंने वकालत के हक़ का इस्तेमाल करते हुए फूफी को तलाक़ दे दी और फूफी के पूर्व शौहर से शादी कर ली।" क़ाज़ी ने हैरत से पूछा, "फिर?" वह कहने लगी, "क़ाज़ी साहब, कहानी अभी ख़त्म नहीं हुई।" "कुछ समय बाद मेरे उस शायर शौहर का इंतक़ाल हो गया। मेरी यह फूफी विरासत (संपत्ति) का दावा करती हुई पहुँच गईं। मैंने उनसे कहा कि मेरे शौहर ने तुम्हें अपनी ज़िंदगी में तलाक़ दे दी थी, अब विरासत में तुम्हारा कोई हिस्सा नहीं है। झगड़ा लंबा खिंच गया, इस दौरान मेरी इद्दत (प्रतीक्षा अवधि) भी गुज़र गई। एक दिन मेरी यह फूफी अपनी बेटी और दामाद (यानी मेरे पूर्व शौहर) को लेकर मेरे घर आईं और विरासत के झगड़े में मेरे इसी पूर्व शौहर को सालिस (मध्यस्थ) बनाया। उसने मुझे कई सालों बाद देखा था; मर्द अपनी पहली मोहब्बत नहीं भूलता है, चुनाँचे मुझसे इस तरह मिलकर उसकी पहली मोहब्बत जाग उठी। मैंने उससे कहा, 'क्या फिर मुझसे शादी करोगे?' उसने हाँ कर दी। मैंने उनके सामने शर्त रख दी कि अपनी पहली बीवी (मेरी फूफी की बेटी) का मामला मेरे हाथ में दें। उन्होंने ऐसा ही किया। मैंने अपने पूर्व शौहर से शादी कर ली और उसकी बीवी को शौहर की वकालत करते हुए तलाक़ दे दी।" क़ाज़ी इब्न अबी लैला सर पकड़ कर बैठ गए, फिर पूछा, "इस केस में अब मसला क्या है?" मेरी फूफी कहने लगीं, "क़ाज़ी साहब, क्या यह हराम नहीं है कि इस लड़की ने मेरी और मेरी बेटी दोनों की तलाक़ करवा दी, फिर मेरा शौहर और मेरी बेटी का शौहर भी ले उड़ी, इसी पर बस नहीं, दोनों शौहरों की विरासत भी अपने नाम कर ली!" क़ाज़ी इब्न अबी लैला कहने लगे, "मुझे तो इस केस में हराम कहीं नज़र नहीं आया। तलाक़ भी जायज़ है, वकालत भी जायज़ है, और तलाक़ के बाद बीवी पूर्व शौहर के पास दोबारा जा सकती है, बशर्ते कि बीच में किसी और से उसकी शादी होकर तलाक़ हुई हो या शौहर का इंतक़ाल हुआ हो। तुम्हारी कहानी में भी ऐसा ही हुआ है।" इसके बाद क़ाज़ी ने ख़लीफ़ा मंसूर को यह वाक़या सुनाया। ख़लीफ़ा हंसते-हंसते लोट-पोट हो गए और कहा, "जो कोई अपने भाई के लिए गड्ढा खोदेगा, वह ख़ुद उस गड्ढे में गिरेगा। यह बुढ़िया तो गड्ढे के बजाय गहरे समंदर में गिर गई।" (किताब: जमउल जवाहिर फ़िल हुसरी) ____________📝📝____________ मनक़ूल। चयन: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप