New Sad Urdu Ghazal 2026 - Yaadon Me Rote Hen - Hisham Younus

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बिना सोचे-समझे बोले गए शब्दों का ज़हर और रिश्तों की तबाही

बिना सोचे-समझे बोले गए शब्दों का ज़हर और रिश्तों की तबाही

एक सहेली ने दूसरी सहेली से पूछा, "बच्चा पैदा होने की खुशी में तुम्हारे शौहर (पति) ने तुम्हें क्या तोहफ़ा दिया???" सहेली ने कहा, "कुछ भी नहीं!!!!" उसने सवाल करते हुए पूछा, "क्या यह अच्छी बात है??? क्या उनकी नज़र में तुम्हारी कोई क़ीमत नहीं???" लफ़्ज़ों (शब्दों) का यह ज़हरीला बम गिराकर वह सहेली दूसरी सहेली को अपनी ही चिंता और सोच के जाल में उलझा हुआ छोड़कर चलती बनी!!!! थोड़ी देर बाद ज़ुहर (दोपहर) के वक़्त उसका शौहर घर आया और बीवी का मुँह लटका हुआ पाया। फिर दोनों का झगड़ा हुआ, एक दूसरे को बुरा-भला कहा, मारपीट हुई और शौहर ने उसे तलाक़ दे दी!!!! जानते हैं प्रॉब्लम (समस्या) की शुरुआत कहाँ से हुई??? उस फ़ज़ूल (व्यर्थ) जुमले से जो उसकी इयादत (हाल-चाल पूछने) करने आई सहेली ने कहा था!!!! इसी तरह ज़ैद ने हामिद से पूछा!! "तुम कहाँ काम करते हो??" हामिद: "फ़लाँ दुकान में!!" "माहाना (मासिक) कितनी तन्ख़्वाह देता है??" हामिद: "18,000 रुपये!!" ज़ैद: "18,000 रुपये बस! आपकी ज़िंदगी कैसे कटती है इतने पैसों में??" हामिद, गहरी साँस खींचते हुए, "बस यार क्या बताऊँ!!" मीटिंग ख़त्म हुई!! कुछ दिनों के बाद हामिद अब अपने काम से बेज़ार (परेशान/उब) हो गया, और तन्ख़्वाह बढ़ाने की डिमांड कर दी, जिसे मालिक ने रद्द कर दिया। नौजवान ने जॉब छोड़ दी और बेरोज़गार हो गया। पहले उसके पास काम था, अब काम नहीं रहा!!! एक साहब ने एक शख़्स से कहा जो अपने बेटे से अलग रहता था!! "तुम्हारा बेटा तुम से बहुत कम मिलने आता है, क्या उसे तुम से मोहब्बत नहीं??" बाप ने कहा, "बेटा मसरूफ़ (व्यस्त) रहता है, उसके काम का शिड्यूल सख़्त है। उसके बीवी-बच्चे हैं, उसे बहुत कम वक़्त मिलता है!!" पहला आदमी बोला, "वाह! यह क्या बात हुई। तुमने उसे पाला-पोसा, उसकी हर ख़्वाहिश पूरी की, अब ख़ुद को ख़्वामख़्वाह समझाते हो कि उसको मसरूफ़ियत की वजह से मिलने का वक़्त नहीं मिलता, यह तो न मिलने का बहाना है!!" इस गुफ़्तगू (बातचीत) के बाद, बाप के दिल में बेटे के लिए ख़लिश (खटास/टीस) सी पैदा हो गई। बेटा जब भी मिलने आता, वह यही सोचता रहता कि इसके पास सब के लिए वक़्त है सिवाय मेरे! याद रखिए! ज़बान से निकले अल्फ़ाज़ (शब्द) दूसरों पर बहुत गहरा असर डाल सकते हैं! बेशक कुछ लोगों की ज़बानों से शैतान बोल जाता है! हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कुछ सवालात हमें बहुत मासूम लगते हैं! "तुमने यह क्यों नहीं ख़रीदा?" "तुम्हारे पास यह क्यों नहीं है?" "तुम इस शख़्स के साथ पूरी ज़िंदगी कैसे चल सकती हो?" "तुम इसे कैसे मान सकते हो?" इस तरह के ज़्यादातर सवालात नादानी में या बिला-मक़सद (बिना किसी उद्देश्य के) हम पूछ बैठते हैं, जबकि यह भूल जाते हैं कि हमारे ये सवालात सुनने वाले के दिल में नफ़रत या मोहब्बत का कौन सा बीज बो रहे हैं! आज के दौर में हमारे आस-पास या घरों में जो फ़साद (झगड़े) हो रहे हैं, उनकी जड़ तक जाया जाए तो अक्सर इसके पीछे किसी और का हाथ होता है। वे यह नहीं जानते कि नादानी में या जान-बूझकर बोले जाने वाले जुमले किसी की ज़िंदगी को तबाह कर सकते हैं! फ़साद फैलाने वाले न बनो!! लोगों के घरों में अंधे बनकर जाओ और वहाँ से गूंगे बनकर निकलो। 💐💐💐💐💐💐💐🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 सदक़ा-ए-जारिया (निरंतर पुण्य) के लिए इस तहरीर (लेख) को शेयर ज़रूर करें। ____________📝📝_____________ मनक़ूल (उद्धृत)। चयन: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप