Amazing Kalam 2026 - Aata Hai Nazar - Hafiz Nizamuddin

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आख़िरत की छतरी

आख़िरत की छतरी

एक दफ़ा क्रिकेट मैच के दौरान जब अचानक बारिश शुरू हुई तो स्टेडियम में मौजूद हर शख़्स ने अपनी छतरी खोलकर सर पर रख ली थी। जब उस वक़्त कैमरा तमाशाइयों (दर्शकों) के स्टैंड पर गया तो रंग-बिरंगी छतरियों का एक हसीन मंज़र तैयार हो चुका था, शायद ही कोई ऐसा शख़्स हो जिसने छतरी न ली हो या बारिश की बरसाती (रेनकोट) न पहनी हो। यह देखकर सवाल उठता है कि स्टेडियम में मौजूद हज़ारों लोगों के पास एक ही समय (बैक वक़्त) छतरी या बरसाती क्यों थी? जवाब यह है कि इन लोगों ने मैच से पहले 'फ़ोरकास्ट' यानी मौसम की जानकारी कंप्यूटर, टीवी या मोबाइल पर हासिल कर ली थी, उन्हें यक़ीन था कि मैच के दौरान बारिश होगी, चुनांचे वे इससे बचने का बंदोबस्त पहले से ही कर चुके थे, जिसकी वजह से बारिश के कारण वे न तो ज़्यादा भीगे और न ही किसी और तकलीफ़ का सामना करना पड़ा। इससे एक और बात ज़ेहन (दिमाग़) में आती है कि हमारे पास सबसे ज़्यादा विश्वसनीय स्रोत (معتبر ذرائع) यानी आख़िरी नबी ﷺ के ज़रिए फ़ोरकास्ट यानी क़ुरआन पहुँच चुका है, जिसमें साफ़ तौर पर लिखा है कि मरने के बाद किस तरह का सवालनामा होगा, किन चीज़ों पर अल्लाह की पकड़ होगी और किन आमाल (कर्मों) का सवाब (पुण्य) मिलेगा। फिर इससे एक और सवाल उठता है कि जब हमारे पास इतनी पक्की और सच्ची ख़बर मौजूद है तो फिर हम इसकी तैयारी क्यों नहीं करते? मामूली सी बारिश की भविष्यवाणी (پیشنگوئی) पर तो हम छतरी और बरसाती साथ रख लेते हैं, जन्नत की बशारत (ख़ुशख़बरी) और जहन्नम की ख़बर सुनकर हम छाते और छतरी का बंदोबस्त क्यों नहीं करते? इसकी वजह या तो यह हो सकती है कि हम अल्लाह के क़ुरआन और उसके इस सच्चे नबी ﷺ की बातों पर उतना भी यक़ीन नहीं रखते, जितना हम मौसम का हाल सुनाने वाली न्यूज़कास्टर पर करते हैं, दूसरी वजह यह हो सकती है कि हमें यक़ीन है कि हमने मरना ही नहीं। दोनों सूरतों में हम अपने आप को धोखा दे रहे हैं और गुमराही के गढ़े में जा रहे हैं। अल्लाह के नबी ﷺ ने जो बशारत और जहन्नम के अज़ाब की ख़बर सुनाई, कम से कम इतनी अहमियत तो दें कि हम एक अदद छतरी का ही बंदोबस्त कर लें जो हमें क़ियामत के रोज़ अज़ाब की बारिश से बचा सके... (मनक़ूल - साभार) 💞 पोस्ट अच्छी लगे तो दूसरों की भलाई के लिए शेयर ज़रूर करें 💞