افتتاح درس بخاری شریف

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दिल का सदक़ा: एक गरीब महिला की खूबसूरत सीख

दिल का सदक़ा: एक गरीब महिला की खूबसूरत सीख

एक गरीब औरत ने बड़ी इज़्ज़त के साथ आवाज़ दी, "आ जाइए मैडम, आप यहाँ बैठ जाएँ," कहते हुए उसने अपनी सीट पर एक उस्तानी (शिक्षिका) को बिठा दिया और खुद बस में खड़ी हो गई। मैडम ने, "बहुत-बहुत शुक्रिया, मेरी तो बुरी हालत थी, सच में," कहते हुए दुआएँ दीं। उस गरीब औरत के चेहरे पर एक खुशनुमा मुस्कान फैल गई। कुछ देर बाद उस्तानी के पास वाली सीट खाली हो गई, लेकिन उस औरत ने एक और औरत को, जो एक छोटे बच्चे के साथ सफर कर रही थी और मुश्किल से बच्चे को उठा पा रही थी, को सीट पर बिठा दिया। अगले पड़ाव पर बच्चे वाली औरत भी उतर गई, सीट फिर खाली हो गई, लेकिन उस नेक दिल औरत ने फिर भी बैठने की बिल्कुल कोशिश नहीं की बल्कि उस एक कमज़ोर और बुज़ुर्ग आदमी को बिठा दिया, जो अभी-अभी बस में सवार हुए थे। कुछ देर के बाद वे बुज़ुर्ग भी उतर गए, सीट फिर से खाली हो गई। बस में अब चंद मुसाफ़िर ही रह गए थे, अब उस उस्तानी ने गरीब ख़ातून (महिला) को अपने पास बिठाया और पूछा कि "कितनी बार सीट खाली हुई लेकिन आप लोगों को बिठाती रहीं, खुद नहीं बैठीं, क्या बात है?" उस ख़ातून ने जवाब दिया, "मैडम, मैं मज़दूर हूँ, मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं कि मैं कुछ सदक़ा व ख़ैरात (दान-पुण्य) कर सकूँ, तो मैं क्या करती हूँ कि, सड़क में पड़े पत्थरों को उठाकर एक तरफ रख देती हूँ, कभी किसी ज़रूरतमंद को पानी पिला देती हूँ, कभी बस में किसी के लिए सीट छोड़ देती हूँ। फिर जब सामने वाला मुझे दुआएँ देता है तो मैं अपनी ग़रीबी भूल जाती हूँ, मेरी दिनभर की थकान दूर हो जाती है। और तो और, जब मैं रोटी खाने के लिए बाहर बेंच पर बैठती हूँ, कुछ परिंदे (पक्षी) मेरे करीब आकर बैठ जाते हैं, मैं रोटी के छोटे-छोटे टुकड़े करके उनके सामने डाल देती हूँ। जब वे खुशी से चहचहाते हैं तो ख़ुदा की इन मख़्लूक (जीवों) को खुश देखकर मेरा पेट भर जाता है। रुपये-पैसे न सही, सोचती हूँ दुआएँ तो मिल ही जाती होंगी, मुफ़्त में, फायदा ही है ना, और हमें क्या ही लेकर जाना है इस दुनिया से।" उस्तानी हक्का-बक्का रह गई, एक अनपढ़ सी दिखने वाली गरीब औरत उन्हें इतना बड़ा सबक़ पढ़ा गई। अगर दुनिया के आधे लोग भी ऐसी खूबसूरत और सकारात्मक सोच अपना लें तो यह ज़मीन सबके लिए जन्नत बन जाएगी। सदक़ा व ख़ैरात सिर्फ पैसे से नहीं, दिल से भी किया जाता है। _______________________________________ मनकूल (साभार)। चयन: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप

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